D.Pharma : एलोपैथी फार्मेसी में डिप्लोमा, Join

D.Pharma कोर्स क्या है? (What is D.Pharma?)

D.Pharma या डिप्लोमा इन फार्मेसी, एलोपैथी फार्मेसी के क्षेत्र में 2 साल का एक डिप्लोमा प्रोग्राम है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए डिज़ाइन किया गया है जो दवाइयों के निर्माण, मार्केटिंग, और वितरण (Distribution) की बुनियादी समझ हासिल करना चाहते हैं।

यह कोर्स भारतीय फार्मेसी परिषद (PCI – Pharmacy Council of India) द्वारा विनियमित होता है। इसे पूरा करने के बाद आप एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट बन सकते हैं।

D.Pharma के लिए पात्रता (Eligibility Criteria)

कोर्स में प्रवेश लेने के लिए आपको निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना होगा:

  • शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार ने 12वीं कक्षा (Standard XII) पास की हो।
  • अनिवार्य विषय: 12वीं में Physics, Chemistry और Biology (PCB) या Mathematics (PCM) विषय होना अनिवार्य है।
  • न्यूनतम अंक: सामान्यतः मान्यता प्राप्त बोर्ड से कम से कम 45% से 50% अंक होने चाहिए।
  • आयु सीमा: प्रवेश के समय उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए।

डी. फार्मा का सिलेबस: आप क्या सीखेंगे?

2 साल के इस सफर में आपको दवाइयों की दुनिया से जुड़ी हर बारीकी सिखाई जाती है। मुख्य विषयों में शामिल हैं:

  1. Pharmaceutics: दवाइयों को बनाने की विधि।
  2. Pharmaceutical Chemistry: दवाओं की रासायनिक संरचना।
  3. Pharmacognosy: प्राकृतिक स्रोतों (पौधों) से प्राप्त औषधियां।
  4. Pharmacology: शरीर पर दवाओं का प्रभाव।
  5. Hospital & Clinical Pharmacy: अस्पतालों में फार्मेसी का प्रबंधन।

डी. फार्मा के बाद करियर और नौकरी के अवसर

D.Pharma करने के बाद आपके पास सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में ढेरों विकल्प खुल जाते हैं:

1. खुद का मेडिकल स्टोर (Entrepreneurship)

D.Pharma पूरा करने के बाद आपको ‘ड्रग लाइसेंस’ मिलता है, जिससे आप अपना खुद का एलोपैथी रिटेल या होलसेल मेडिकल स्टोर खोल सकते हैं। यह सबसे लोकप्रिय और कमाई वाला विकल्प है।

2. सरकारी नौकरियां

केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न विभागों जैसे Railway, Defense (Army/Navy), और सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट के पदों पर भर्तियां निकालती हैं।

3. प्राइवेट सेक्टर में भूमिकाएं

  • Medical Representative (MR): दवा कंपनियों के उत्पादों का प्रचार करना।
  • Production Chemist: दवा कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में काम करना।
  • Quality Control Executive: दवाओं की गुणवत्ता की जांच करना।

4. उच्च शिक्षा (Higher Education)

अगर आप आगे बढ़ना चाहते हैं, तो D.Pharma के बाद आप सीधे B.Pharma के दूसरे वर्ष (Lateral Entry) में प्रवेश ले सकते हैं।